सच क्या है? सर बी.एन. राउ और भारतीय संविधान पर एक वास्तविक तथ्य जांच
क्या सर बी.एन. राउ ने वास्तव में बिना किसी पैसे के हमारा संविधान लिखा था?
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि संविधान सभा के धुरंधरों में एक सर बी.एन. राउ (Sir B.N. Rau) थे, जिन्होंने निःशुल्क और नि:स्वार्थ भाव से संविधान का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। सवाल उठता है कि क्या हम उन्हें सम्मान नहीं दे रहे?
भावनाओं में बहकर इसे साझा करना आसान है, लेकिन क्या यह ऐतिहासिक तथ्यों पर खरा उतरता है? आइए, इस संदेश का गहराई से विश्लेषण करते हैं और जानते हैं कि सच्चाई क्या है।
विश्लेषण: सच और अतिशयोक्ति के बीच
1. सर बी.एन. राउ की भूमिका: वास्तुकार या सलाहकार?
तथ्य (True): यह बात पूरी तरह सही है कि बेनेगल नरसिंह राउ (B.N. Rau) संविधान निर्माण में एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। वे संविधान सभा के संविधान सलाहकार (Constitutional Adviser) थे।
राउ साहब एक बुद्धिजीवी और कुशल प्रशासक थे। उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों (जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड, कनाडा) के संविधानों का गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने अपनी रिसर्च के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट और संविधान का प्रारंभिक मसौदा (Initial Draft) तैयार किया। उनकी इस मेहनत ने ड्राफ्टिंग कमेटी के लिए रास्ता साफ किया।
2. "निःशुल्क" काम करने का दावा: सच क्या है?
भ्रामक (False): वायरल संदेश में दावा किया गया है कि राउ साहब ने बिना कोई पैसा लिए (निःशुल्क) यह काम किया। यह ऐतिहासिक रूप से गलत है।
सर बी.एन. राउ एक भारतीय सिविल सेवा (ICS) के अधिकारी थे। उन्हें संविधान सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया था और सरकार द्वारा उन्हें उनका पूरा वेतन (Salary) दिया जाता था। वे कोई स्वयंसेवक (Volunteer) नहीं थे, बल्कि अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे थे। उनका काम नि:स्वार्थ जरूर था, लेकिन "निःशुल्क" शब्द का प्रयोग तथ्यों को भ्रमित करता है।
3. प्रक्रिया और डिबेट: क्या सीधे राउ के मसौदे पर हुई बहस?
आंशिक सत्य: संदेश कहता है कि राउ के मसौदे पर डिबेट हुई और संविधान बना। यहाँ थोड़ी स्पष्टता जरूरी है।
- सबसे पहले, राउ साहब ने फरवरी 1948 में अपना मसौदा डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता वाली ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंपा।
- ड्राफ्टिंग कमेटी ने इस मसौदे पर कड़ी मेहनत की, कई संशोधन किए और इसे परिष्कृत रूप में तैयार किया।
- सीधे राउ के मसौदे पर सदन में बहस नहीं हुई, बल्कि डॉ. अंबेडकर और उनकी कमेटी द्वारा तैयार किया गया 'Draft Constitution of India' ही सदन के सामने रखा गया था। राउ साहब की भूमिका जरूरी थी, लेकिन अंतिम रूप ड्राफ्टिंग कमेटी का था।
4. सम्मान और विरासत
सर बी.एन. राउ को उनके योगदान के लिए कम सम्मान नहीं मिला। इतिहासकार और विद्वान उन्हें संविधान के "अदृश्य वास्तुकार" के रूप में याद करते हैं। उनके सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सन् 1966 में पद्म विभूषण से नवाजा।
अतिरिक्त तथ्य: जो शायद आप नहीं जानते (Additional Facts)
- दुनिया भ्रमण: मसौदा तैयार करने से पहले राउ साहब ने अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड और कनाडा जैसे देशों का दौरा किया। उन्होंने वहां के विधि विशेषज्ञों और न्यायाधीशों से मुलाकात कर भारत के लिए बेहतरीन प्रावधानों पर चर्चा की।
- संविधान के पिता का सम्मान: जबकि डॉ. अंबेदकर को "भारतीय संविधान के पिता" कहा जाता है, डॉ. अंबेडकर खुद राउ साहब की बुद्धिमत्ता और मेहनत के कायल थे।
- अंतरराष्ट्रीय अदालत में भारत का प्रतिनिधित्व: संविधान बनने के बाद राउ साहब संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के प्रतिनिधि बने और बाद में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया।
- पुस्तक: उन्होंने अपने अनुभवों को एक किताब के रूप में संकलित किया जिसका नाम था 'Constitutional Precedents'। यह किताब आज भी कानूनी विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ का काम करती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
वायरल संदेश मिश्रित सत्यता (Mixed Truth) वाला है। हाँ, सर बी.एन. राउ का योगदान अविस्मरणीय है, लेकिन उन्हें सही सम्मान देने के लिए हमें तथ्यों को बिना तोड़-मरोड़ के पेश करना चाहिए। उन्होंने एक ICS अधिकारी के रूप में अपनी तनख्वाह पर काम किया और साथ ही डॉ. अंबेडकर की अगुवाई वाली ड्राफ्टिंग कमेटी की भूमिका को भी कम नहीं आंका जा सकता।
सच्चा सम्मान यही है कि हम उनके योगदान को सही-सही जानें और समझें।
संदर्भ और स्रोत (References)
- संविधान निर्माता और संविधान सभा के कार्यवृत्त - Constituent Assembly Debates (Official Records).
- ग्रन विली, वाल्टर (Granville Austin) - The Indian Constitution: Cornerstone of a Nation. (पुस्तक में राउ के योगदान का विस्तृत उल्लेख है).
- पद्म विभूषण पुरस्कार विवरण - भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आधिकारिक अभिलेख (1966).
- राजेंद्र प्रसाद - India Divided (जहाँ संविधान निर्माण प्रक्रिया का वर्णन है).
- श्याम राजसिंह नेगी - B.N. Rau: The Architect of the Constitution of India.

0 Comments