भीमा कोरेगांव युद्ध: "गद्दार दिवस" या "शौर्य दिवस"? वायरल दावों का पूरा सच

भीमा कोरेगांव युद्ध: "गद्दार दिवस" या "शौर्य दिवस"?

भीमा कोरेगांव युद्ध: "गद्दार दिवस" या "शौर्य दिवस"? वायरल दावों का पूरा सच

सोशल मीडिया पर भीमा कोरेगांव युद्ध (1 जनवरी 1818) को लेकर अक्सर कई तरह के दावे किए जाते हैं। हाल ही में एक वायरल संदेश में इस युद्ध को "गद्दारी" से जोड़ते हुए, मध्य प्रदेश के 'नैकहाई' (Naikhai) युद्ध और 'अफ्रीकी नौकरों' (African Servants) द्वारा अंग्रेजों की मदद करने की बात कही गई है।

आज के इस फैक्ट चेक आर्टिकल में, हम ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों के आधार पर इन दावों की पड़ताल करेंगे।

दावा क्या है?

वायरल संदेश में दावा किया गया है कि:

  1. भीमा कोरेगांव की लड़ाई 57 वर्षों से चल रहे उस संघर्ष का हिस्सा है जो मध्य प्रदेश के 'नैकहाई' से शुरू हुआ था।
  2. निज़ामशाही और आदिलशाही समय के 'अफ्रीकी नौकरों' ने अंग्रेजों को अपने घरों में छुपाया और उन्हें तमिलनाडु भागने का रास्ता दिया।
  3. इसे "गद्दार दिवस" के रूप में मनाया जाना चाहिए।

आइए, इन दावों की सच्चाई जानते हैं।

1. "नाइकहाई" और 57 साल का खूनी संघर्ष: क्या है सच?

वायरल संदेश में दावा किया गया है कि पेशवा बनाम ब्रिटिश के बीच 57 साल का खूनी संघर्ष मध्य प्रदेश के "नाइकहाई" से शुरू हुआ, जिसमें भीमा कोरेगांव का युद्ध भी शामिल है।

  • नाइकहाई (मध्य प्रदेश) कनेक्शन: यह सच है कि मध्य प्रदेश के रीवा/बुंदेलखंड क्षेत्र के स्थानीय इतिहास में "नाइकहाई युद्ध" का उल्लेख मिलता है। यह पेशवा की सेनाओं (या उनके सहयोगियों) और ब्रिटिश/स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों के बीच एक महत्वपूर्ण संघर्ष था। पेशवाओं का मध्य भारत (बुंदेलखंड/मालवा) में गहरा प्रभाव था। इसलिए, पेशवा शक्ति के पतन या अंग्रेजों के साथ लंबे समय से चल रहे संघर्ष को इस क्षेत्र से जोड़ना ऐतिहासिक रूप से व्यापक एंग्लो-मराठा युद्धों के संदर्भ में तर्कसंगत हो सकता है। हालांकि, यह दावा कि भीमा कोरेगांव का युद्ध या एंग्लो-मराठा युद्धों की शुरुआत सीधे तौर पर मध्य प्रदेश के "नाइकहाई" से हुई, इसका कोई सीधा ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। भीमा कोरेगांव का युद्ध महाराष्ट्र में हुआ था।
  • 57 साल का युद्ध: "57 साल के खूनी संघर्ष" का दावा भी ऐतिहासिक रूप से सटीक नहीं है। एंग्लो-मराठा युद्ध मुख्य रूप से तीन चरणों में लड़े गए थे: पहला (1775-1782), दूसरा (1803-1805) और तीसरा (1817-1818)। ये युद्ध अलग-अलग अवधियों में हुए, जिनके बीच शांति का दौर भी था, न कि यह लगातार 57 वर्षों तक चला कोई एक युद्ध था। भीमा कोरेगांव का युद्ध 1 जनवरी 1818 को तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध के दौरान लड़ा गया था।

2. भीमा कोरेगांव: "गद्दारी" का प्रतीक या "शौर्य" का दिन?

संदेश में भीमा कोरेगांव युद्ध को "विश्व में गद्दारी के लिए जाना जाता है" बताया गया है और इसे "गद्दार दिवस" के रूप में मनाने की बात कही गई है।

  • युद्ध का वास्तविक स्वरूप: भीमा कोरेगांव का युद्ध 1 जनवरी 1818 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और मराठा संघ के पेशवा गुट के बीच लड़ा गया था। ब्रिटिश पक्ष में मुख्य रूप से बॉम्बे नेटिव इन्फैंट्री की दूसरी बटालियन (लगभग 800 सैनिक) थी, जिसमें महार सैनिकों की बड़ी संख्या के साथ-साथ मराठा (जाति), राजपूत, मुस्लिम और यहूदी भी शामिल थे। पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना काफी विशाल थी (लगभग 28,000, हालांकि गांव पर केवल 2,000 ने हमला किया), जिसमें मुख्य रूप से अरब भाड़े के सैनिक, गोसाईं और मराठा पैदल सैनिक थे।
  • "गद्दार दिवस" बनाम "शौर्य दिवस": यह एक विवादास्पद और राजनीतिक दृष्टिकोण है।
    • कुछ लोग इसे "गद्दार दिवस" मानते हैं, क्योंकि भारतीय सैनिकों ने एक भारतीय शासक (पेशवा) के खिलाफ अंग्रेजों के लिए लड़ाई लड़ी थी।
    • इसके विपरीत, दलित समुदाय 1 जनवरी को "शौर्य दिवस" के रूप में मनाते हैं। उनके लिए यह युद्ध पेशवा शासन के दौरान प्रचलित जाति-आधारित उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध और सम्मान की लड़ाई का प्रतीक है, जिसमें महार सैनिकों के पराक्रम को याद किया जाता है। ऐतिहासिक विवरण इस युद्ध को मुख्य रूप से जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखते हैं, न कि "विश्व में गद्दारी" के रूप में।

3. "अफ्रीकी नौकरों" द्वारा ब्रिटिश सैनिकों को छिपाने का दावा: कितना सच?

वायरल संदेश का दावा है कि "निज़ामशाही आदिलशाही के समय लाए गए अफ्रीकी नौकरों ने न केवल देश की सेना को धोखा दिया बल्कि ब्रिटिश सेना को अपने घरों में रात भर छिपाए भी रखा और उन्हें तमिलनाडु भागने का रास्ता भी साफ किया।"

  • सिद्दी (हब्शी) समुदाय की भूमिका: यह सच है कि सिद्दी (हब्शी) समुदाय के लोग निज़ामशाही और आदिलशाही सल्तनतों के दौरान भारत लाए गए थे और उन्होंने दक्कन में महत्वपूर्ण सैन्य और प्रशासनिक भूमिकाएँ निभाईं।
  • भीमा कोरेगांव में भूमिका का अभाव: भीमा कोरेगांव युद्ध (1818) के विशिष्ट संदर्भ में, इस बात का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है कि "अफ्रीकी नौकरों" ने ब्रिटिश सैनिकों को अपने घरों में छिपाया था या उन्हें तमिलनाडु भागने में मदद की थी। ब्रिटिश सेना कोरगांव गांव में डटी हुई थी और पेशवा की सेना के खिलाफ एक भीषण लड़ाई लड़ रही थी। वे छिप नहीं रहे थे, बल्कि पानी और भोजन से वंचित होने के बावजूद लड़ रहे थे। रात में, उन्होंने अपने घायलों को वापस लिया और शिराऊर (Shirur) में अपने बेस पर लौट आए, न कि तमिलनाडु भागे।
  • तमिलनाडु कनेक्शन की भ्रांति: तमिलनाडु का जिक्र संभवतः मद्रास आर्टिलरी (जो मद्रास प्रेसीडेंसी से थे, जिसे अब तमिलनाडु के नाम से जाना जाता है) की उपस्थिति के कारण हुआ होगा, जो ब्रिटिश पैदल सेना के साथ लड़े थे। वे "भागकर" तमिलनाडु नहीं गए थे; वे लड़ने वाली इकाई का हिस्सा थे।

4. पेशवा युद्धक्षेत्र मध्य प्रदेश में?

संदेश में "मध्य प्रदेश में पेशवा बैटलफील्ड्स को प्रणाम" कहा गया है।

  • जबकि पेशवा, विशेष रूप से बाजीराव प्रथम, मध्य प्रदेश में युद्धों में शामिल थे (जैसे भोपाल का युद्ध), भीमा कोरेगांव का युद्ध महाराष्ट्र के पुणे के पास कोरेगांव में हुआ था। इसलिए, भीमा कोरेगांव को "मध्य प्रदेश में पेशवा युद्धक्षेत्रों" से जोड़ना भौगोलिक रूप से गलत है।

निष्कर्ष

भीमा कोरेगांव युद्ध के संबंध में वायरल संदेश में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अशुद्धियाँ हैं। यह युद्ध, उसके संदर्भ, इसमें शामिल पक्ष और इससे जुड़ी स्मृतियां, सभी को लेकर एक जटिल और बहुआयामी ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य है। 1 जनवरी एक ऐसा दिन है जिसकी व्याख्याएं विभिन्न समुदायों द्वारा अलग-अलग तरीके से की जाती हैं। किसी भी ऐतिहासिक घटना को समझने के लिए तथ्यों की बारीकी से पड़ताल करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।दलित समुदाय (विशेषकर महार रेजिमेंट के सम्मान में) इसे "शौर्य दिवस" (Day of Valour) के रूप में मनाते हैं, क्योंकि वे इसे जातिगत उत्पीड़न और पेशवाशाही के खिलाफ लड़ाई के रूप में देखते हैं। इसे "गद्दारी" कहना एक विशेष राजनीतिक विचारधारा को दर्शाता है जो दलित विमर्श (Dalit narrative) का विरोध करती है।

संदर्भ:

  • Duff, James Grant. A History of the Mahrattas.
  • Gazetteer of the Bombay Presidency: Pune District (1885).
  • Local Rewa Histories (Vindhya Region Records).


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