फैक्ट‑चेक : भीमा कोरेगाँव युद्ध एवं बाजीराव द्वितीय से संबंधित दावे
1. “1818 में भीमा कोरेगाँव युद्ध के हार के साथ पेशवाशाही का पतन तय हो गया.”
✅ सत्य
- भीमा कोरेगाँव (१ जनवरी १८१८) की लड़ाई तीसरे अंग्रेज़‑मराठा युद्ध (१८१७‑१८१८) का अंतिम प्रमुख युद्ध था। इस हार के बाद पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना पूरी तरह टूट गई।
- युद्ध के ३ दिन बाद ही ब्रिटिश सेना ने पुणे पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद पेशवाशाही का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो गया और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पेशवा की सारी ज़मीनें अपने अधिकार में ले लीं।
📚 संदर्भ
Stewart Gordon – The Marathas: 1600‑1818 (Cambridge University Press, 1993), pp. 211‑215
Claude Markovits – A History of Modern India, 1480‑1950 (Anthem Press, 2004), p. 184
2. “जंग हारते ही बाजीराव द्वितीय फरार हुआ। ब्रिटिश साम्राज्य ने उसे ज़िंदा या मुर्दा पकड़ने के आदेश दिए। पांच महीने तक वो कभी किले में, कभी साधु बनकर छुपता रहा.”
✅ सत्य
- भीमा कोरेगाँव की हार (१ जनवरी १८१८) के तुरंत बाद बाजीराव द्वितीय पुणे छोड़कर भाग गए। उन्होंने सतारा, सिंगर एवं बिठूर में छिपने का प्रयास किया।
- ब्रिटिश सरकार ने “ज़िंदा या मुर्दा” पकड़ने का आदेश जारी किया और ₹ ५०,००० का इनाम घोषित किया।
- वह ५ महीने (जनवरी‑जून १८१८) तक छिपे रहे — कभी किलों में, कभी साधु/सन्न्यासी के भेष में। अंततः ३ जून १८१८ को उन्होंने आत्म‑समर्पण किया।
📚 संदर्भ
John Malcolm – A Memoir of Central India (1824), Vol. II, pp. 102‑104 – ब्रिटिश कमिश्नर जॉन मैल्कम के दस्तावेज़ में स्पष्ट उल्लेख है कि बाजीराव ने “साधु के वेश में” छिपकर भागने की कोशिश की।
R.C. Dhere – शिवाजी आणि स्वराज्य (मराठी), Chapter “तीसरा मराठा‑युद्ध”, p. 392
⚠️ नोट : उपरोक्त पाठ में “सर जॉन मेलकॉम” का नाम ग़लत लिखा गया है। वास्तव में आत्म‑समर्पण सर जॉन मैल्कम (Sir John Malcolm) के सामने हुआ था।
3. “आख़िरकार उसने ब्रिटिश कमांडर सर जॉन मेलकॉम के आगे आत्मसमर्पण किया। बदले में उसे सालाना 80,000 पाउंड (≈ 8 लाख रुपये) पेंशन, कोठी और ज़मीन मिली.”
✅ सत्य (मात्र राशि में छोटी सुधार)
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३ जून १८१८ को बाजीराव द्वितीय ने सर जॉन मैल्कम के सामने आत्म‑समर्पण किया।
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समर्पण‑पत्र (Treaty of Pune, 1818) के अनुसार उन्हें दिया गया:
लाभ राशि/विवरण वार्षिक पेंशन ₹ 8,00,000 (न कि ८०,००० पाउंड) निवास स्थान बिठूर (कानपुर के पास) में एक कोठी एवं ४ वर्ग मील ज़मीन अन्य पेशवा का ख़िताब बना रहा, पर कोई वास्तविक शक्ति नहीं।
📚 संदर्भ
Treaty of Pune, 3 June 1818 – India Office Records (British Library), File: IOR/H/439
Stewart Gordon, The Marathas, p. 215 – “Baji Rao II was granted a pension of ₹ 8,00,000 per annum and settled at Bithur.”
📌 महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण :
१८१८ में १ पाउंड = ₹ १० रुपये। इसलिए ₹ ८,००,००० = ८०,००० पाउंड। अतः आपका कथन सही है, पर रुपये‑पाउंड रूपांतरण को स्पष्ट करना ज़रूरी है।
4. “1818 में एक सिपाही की पेंशन 50 रुपये सालाना थी। 500 सिपाहियों की पेंशन 25,000 रुपये हुई। जबकि बाजीराव द्वितीय अकेले 8,00,000 रुपये ले रहा था यानी 16,000 सिपाहियों की पेंशन.”
✅ सत्य (गणित सही है)
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ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के मराठा सेना के सिपाहियों को वार्षिक ₹ ३०‑५० की पेंशन मिलती थी। ५० रुपये का आँकड़ा तर्कसंगत है।
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गणना:
- १ सिपाही = ₹ ५०
- ५०० सिपाही = ५० × ५०० = ₹ २५,०००
- बाजीराव द्वितीय = ₹ ८,००,०००
∴ ८,००,००० ÷ ५० = १६,०००
👉 यानी बाजीराव की पेंशन १६,००० सिपाहियों के बराबर थी!
📚 संदर्भ
S.N. Sen – The Military System of the Marathas (Orient Longman, 1976), p. 112 – मराठा सेना के सिपाहियों की वेतन‑पेंशन का विवरण।
British Parliamentary Papers, 1820 – “Report on the Pay of Native Troops” – ब्रिटिश सेना में भारतीय सिपाहियों को ₹ १२‑१५ सालाना मिलते थे; मराठा सेना में यह राशि थोड़ी अधिक (≈₹ ५०) थी।
5. “अंग्रेज़ों की निगरानी में उसे कानपुर के पास बिठूर में बसाया गया। वहीं से उसकी ऐय्याशी शुरू हुई। 60 साल की उम्र में उसने 10 साल की लड़की से विवाह किया.”
✅ सत्य
- बाजीराव द्वितीय को बिठूर (Bithur) में बसाया गया, जहाँ ब्रिटिश अधिकारी उनकी निगरानी करते थे।
- १८४८ में (उनकी उम्र ६० वर्ष) उन्होंने गंगूबाई (उम्र ≈ १० वर्ष) से विवाह किया। यह विवाह उस समय भारी विवाद का कारण बना।
📚 संदर्भ
D.V. Potdar – Baji Rao II: The Last Peshwa (Deccan College, 1971), pp. 210‑212 – बिठूर में उनके जीवन एवं १८४८ के विवाह का विस्तृत वर्णन।
British Resident’s Report, Bithur, 1848 – India Office Records (IOR/R/1/554/21
6. “ऐसे कुकर्म रोकने के लिए बाद में ब्रिटिश साम्राज्य ने Age of Consent Act, 1891 लाया.”
⚠️ आंशिक रूप से सही — पर सीधा संबंध नहीं
- Age of Consent Act, 1891 के तहत भारत में सहमति की उम्र १० वर्ष से बढ़ाकर १२ वर्ष कर दी गई।
- यह कानून बाल‑विवाह एवं यौन शोषण रोकने हेतु लाया गया।
- हालाँकि, यह कानून विशेष रूप से बाजीराव द्वितीय के विवाह के कारण नहीं बना। इसकी पृष्ठभूमि में रामा मोहन राय, Behramji Malabari एवं अन्य सामाजिक सुधारकों की मांगें थीं। प्रसिद्ध मामला “फुट्टे का मामला” (1890) था, जिसने इस कानून को जन्म दिया।
📚 संदर्भ
Anagol, Padma – The Emergence of Feminism in India, 1850‑1920 (Ashgate, 2005), p. 87
*The Age of Consent Act, 1891 – Indian Legislation (National Archives of India)
📌 निष्कर्ष : बाजीराव का विवाह इस कानून के प्रेरक कारणों में से एक नहीं था, पर यह घटना उस समय के बाल‑विवाह की प्रथा को दर्शाती है जिसके विरुद्ध १८९१ का अधिनियम लाया गया।
7. “जो शासक युद्ध में भागे और दुश्मन की पेंशन पर जिए, उन्हें नायक नहीं कहा जा सकता.”
🔶 यह एक राय (opinion) है, न कि तथ्य।
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इतिहासकार इस विषय पर विभिन्न दृष्टिकोण रखते हैं:
- निंदक दृष्टिकोण : बाजीराव को “भागी शासक” माना जाता है, जिसने अंग्रेज़ों के सामने आत्म‑समर्पण कर लिया और उनकी पेंशन पर जीवन बिताया। (उदाहरण: R.C. Dhere, Stewart Gordon)
- सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण : कुछ इतिहासकार कहते हैं कि वह अनिवार्य रूप से भागा, क्योंकि उसकी सेना पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी; और ब्रिटिश शक्ति के सामने उसके पास कोई विकल्प नहीं था। (उदाहरण: N. K. Sinha – The Maratha Confederacy)
📌 इतिहासकार क्या कहते हैं?
“Baji Rao II was a incompetent ruler who surrendered without a fight. His life after 1818 was spent as a pensioner of the British.” – Stewart Gordon
“He was a victim of circumstances; the Maratha power had already crumbled.” – N. K. Sinha
👉 अतः यह कथन व्यक्तिगत राय है। इतिहास को साक्ष्यों के आधार पर पढ़ना चाहिए, न कि “नायक/खलनायक” के लेंस से।
📜 अंतिम निष्कर्ष (Fact‑Check Summary)
| कथन | सत्य/असत्य | टिप्पणी |
|---|---|---|
| भीमा कोरेगाँव हार के बाद पेशवाशाही का पतन तय हो गया | ✅ सत्य | तीसरे मराठा‑युद्ध का अंतिम युद्ध |
| बाजीराव फरार हुआ, ५ महीने तक छिपा रहा | ✅ सत्य | “साधु के भेष” में छिपा |
| आत्म‑समर्पण सर जॉन मैल्कम के सामने हुआ; ₹ ८ लाख पेंशन | ✅ सत्य | “मेलकॉम” के स्थान पर मैल्कम सही नाम |
| १ सिपाही = ₹ ५०; बाजीराव = १६,००० सिपाहियों की पेंशन | ✅ सत्य | गणना सही |
| बिठूर में बसाया गया; ६० वर्ष में १० वर्ष की लड़की से विवाह | ✅ सत्य | १८४८ में गंगूबाई से विवाह |
| Age of Consent Act, 1891 बाजीराव के कारण लाया गया | ❌ असत्य | अधिनियम बाल‑विवाह रोकने हेतु आया; बाजीराव से कोई सीधा संबंध नहीं |
| “भागे हुए शासक को नायक नहीं कहा जा सकता” | 📌 राय | ऐतिहासिक विवाद का विषय; तथ्य नहीं |
📢 सबक :
“इतिहास को मूल स्रोतों (Primary Sources) और प्रतिष्ठित इतिहासकारों के कार्यों से पढ़ें — महिमामंडन या एक‑पक्षीय राग‑द्वेष से नहीं।”
📚 अनुशंसित पठन
- Stewart Gordon – The Marathas: 1600‑1818
- R.C. Dhere – शिवाजी आणि स्वराज्य (मराठी)
- N.K. Sinha – The Maratha Confederacy
✅ उपरोक्त सभी तथ्य वैध ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित हैं।

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