सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस संदेश में किए गए दावे भ्रामक (Misleading) और तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह सही नहीं हैं।
यहाँ इन दावों का बिंदुवार फैक्ट चेक (Fact Check) दिया गया है:
दावा 1: "सामान्य वर्ग के बच्चों को पढ़ने के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती।"
तथ्य: यह दावा गलत है।
- EWS आरक्षण (EWS Reservation): भारत सरकार ने 2019 में 103वें संविधान संशोधन के तहत सामान्य वर्ग (General Category) के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य उन सामान्य वर्ग के लोगों की मदद करना है जिनकी पारिवारिक आय एक निश्चित सीमा (जैसे 8 लाख रुपये सालाना) से कम है।
- स्कॉलरशिप (Scholarships): केंद्र और राज्य सरकारें कई ऐसी स्कॉलरशिप चलाती हैं जो केवल जाति पर आधारित नहीं होतीं, बल्कि 'मेरिट-कम-मीन्स' (Merit-cum-Means) पर आधारित होती हैं। जैसे कि 'नेशनल मेरिट स्कॉलरशिप', 'INSPIRE स्कॉलरशिप' और विभिन्न राज्यों की मेधावी छात्र योजनाएं, जिनका लाभ सामान्य वर्ग के गरीब और होनहार छात्र उठा सकते हैं।
दावा 2: "SC/ST/OBC को 33% नंबर पर नौकरी मिल जाती है, जबकि सामान्य वर्ग को 90% पर भी अपात्र घोषित कर दिया जाता है।"
तथ्य: यह दावा अतिशयोक्तिपूर्ण (Exaggerated) और भ्रामक है।
- अपात्रता (Eligibility): किसी भी सामान्य वर्ग के छात्र को 90% अंक लाने पर "अपात्र" (Ineligible) घोषित नहीं किया जाता। "अपात्र" होने का मतलब है कि वह फॉर्म भरने या परीक्षा देने के योग्य नहीं है, जो कि सच नहीं है।
- कट-ऑफ (Cut-off) का अंतर: यह सच है कि आरक्षण के कारण आरक्षित श्रेणियों (SC/ST/OBC) और सामान्य वर्ग (General) की कट-ऑफ में अंतर होता है। लेकिन यह कहना कि आरक्षित वर्ग का चयन केवल 33% (जो कि अक्सर पासिंग मार्क्स होते हैं) पर हो जाता है और सामान्य वर्ग का 90% पर भी नहीं होता, यह हर परीक्षा के लिए सही नहीं है।
- आजकल प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षित श्रेणियों की कट-ऑफ भी काफी ऊंची जाती है।
- UPSC, Bank, SSC जैसी परीक्षाओं में आरक्षित वर्ग और सामान्य वर्ग की कट-ऑफ में अंतर होता है, लेकिन यह अंतर हमेशा इतना विशाल (33% बनाम 90%) नहीं होता जितना कि वायरल मैसेज में दावा किया गया है।
दावा 3: "सामान्य वर्ग में 50% से ज्यादा ब्राह्मण गरीब हैं।"
तथ्य: इस आंकड़े का कोई आधिकारिक स्रोत (Official Source) नहीं है।
- भारत सरकार जातिगत आधार पर (SC/ST को छोड़कर) आर्थिक डेटा सार्वजनिक नहीं करती है। "50% ब्राह्मण गरीब हैं" जैसा कोई भी आंकड़ा नीति आयोग या एनएसएसओ (NSSO) की किसी आधिकारिक रिपोर्ट से समर्थित नहीं है।
- हालाँकि, सामान्य वर्ग में गरीबी है, इसी तथ्य को स्वीकार करते हुए सरकार ने EWS कोटा लागू किया है, ताकि सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को सहायता मिल सके।
दावा 4: "सामान्य वर्ग की पढ़ाई रोक दी गई है।"
तथ्य: यह दावा पूरी तरह झूठ है।
- भारत में किसी भी वर्ग की पढ़ाई रोकने के लिए कोई कानून या नियम नहीं है। शिक्षा का अधिकार (RTE) सभी बच्चों को समान रूप से शिक्षा की गारंटी देता है। सरकारी स्कूलों और यूनिवर्सिटीज में सामान्य वर्ग के लिए सीटें (अनारक्षित सीटें) हमेशा उपलब्ध होती हैं।
यह दावा आंशिक रूप से सही है, लेकिन इसमें कुछ तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है और कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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आर्थिक सहायता और सुविधाएं: यह सच है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता और सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जैसे कि छात्रवृत्ति, फीस में छूट, और मुफ्त किताबें। ये सुविधाएं उनके शैक्षिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हैं।
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प्रतिशत और योग्यता: यह दावा कि SC/ST/OBC के छात्रों को 33% नंबर आने पर भी सुविधाएं मिलती हैं, आंशिक रूप से सही है। कई योजनाओं में न्यूनतम अंकों की आवश्यकता होती है, लेकिन यह प्रतिशत विभिन्न योजनाओं और संस्थानों के लिए अलग-अलग हो सकता है। सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भी कुछ छात्रवृत्ति और सहायता योजनाएं हैं, लेकिन वे अक्सर आय सीमा और अन्य मानदंडों पर आधारित होती हैं।
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सरकारी नौकरियों में आरक्षण: यह सच है कि भारत में सरकारी नौकरियों में SC/ST/OBC के लिए आरक्षण की व्यवस्था है, जिसका मतलब है कि इन वर्गों के उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग की तुलना में कम अंक आने पर भी नौकरी मिल सकती है, बशर्ते वे आरक्षित श्रेणी के तहत योग्यता मानदंडों को पूरा करते हों।
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सामान्य वर्ग की स्थिति: सामान्य वर्ग, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए भी कुछ आरक्षण और सहायता की योजनाएं हैं। 2019 में, भारत सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण की घोषणा की, जो कि सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में लागू किया गया।
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ब्राह्मण और गरीबी: यह दावा कि सामान्य वर्ग में 50% से ज्यादा ब्राह्मण गरीब हैं, एक अतिरंजित बयान हो सकता है। गरीबी सभी जातियों और वर्गों में पाई जाती है, और यह जरूरी है कि हम इसे जाति के चश्मे से न देखें।
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